आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी और डिजिटल लाइफस्टाइल में गर्दन दर्द एक आम समस्या बन चुकी है। लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करना, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, गलत पोश्चर में बैठना, और शारीरिक गतिविधियों की कमी, ये सभी गर्दन पर लगातार दबाव डालते हैं।
कई बार यह दर्द सिर्फ मांसपेशियों की थकान से नहीं होता, बल्कि गर्दन में नस दबने (पिंच्ड नर्व) का संकेत हो सकता है। यदि समय रहते इस समस्या को पहचाना न जाए और सही इलाज न हो, तो यह हाथों में सुन्नपन, कमजोरी, और रोज़मर्रा के कामों में बाधा निर्माण कर सकती है।
गर्दन में नस दबने के संकेत
गर्दन में नस दबने के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और अक्सर लोग इन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
कुछ प्रमुख संकेत इस प्रकार हैं:
- गर्दन से कंधे, बाजू, या उंगलियों तक फैलता दर्द
- हाथों या उंगलियों में झनझनाहट, सुन्नपन, या जलन
- गर्दन घुमाने में अकड़न या तेज़ दर्द
- हाथों की पकड़ कमजोर होना
- लंबे समय तक बैठने या काम करने पर दर्द का बढ़ जाना
ये लक्षण बताते हैं कि नसों पर दबाव बढ़ रहा है और इसे हल्के में लेना सही नहीं है।
गर्दन में नस दबने के प्रमुख कारण
नस दबने के पीछे कई शारीरिक और जीवनशैली से जुड़े कारण हो सकते हैं:
सर्वाइकल डिस्क बल्ज या स्लिप डिस्क
जब गर्दन की डिस्क अपनी जगह से बाहर की ओर उभर जाती है या फट जाती है, तो वह पास की नसों पर दबाव डालती है।
सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस
उम्र बढ़ने या लंबे समय तक गलत पोश्चर के कारण गर्दन की हड्डियों और डिस्क में घिसाव हो जाता है, जिससे नसें दब सकती हैं।
गलत पोश्चर
लगातार झुककर बैठना, लैपटॉप या मोबाइल नीचे रखकर देखना गर्दन पर अतिरिक्त भार डालता है।
टेक नेक
मोबाइल और लैपटॉप का अत्यधिक उपयोग गर्दन को आगे की ओर झुकाए रखता है, जिससे नसों पर दबाव बढ़ता है।
मांसपेशियों में जकड़न
तनाव और शारीरिक निष्क्रियता से गर्दन और कंधों की मांसपेशियाँ सख्त हो जाती हैं, जो नसों को दबा सकती हैं।
बिना सर्जरी इलाज क्यों जरूरी है?
कई लोग लगातार गर्दन दर्द होने पर दवाइयों या इंजेक्शनों का सहारा लेते हैं, लेकिन ये अक्सर कुछ ही समय के लिए राहत देते हैं। सर्जरी को अंतिम विकल्प माना जाता है क्योंकि इसमें जोखिम है और लंबा रिकवरी समय हो सकता है।
नॉन-सर्जिकल उपचार का उद्देश्य दर्द की जड़ पर काम करना होता है; यानी नस और डिस्क पर पड़े दबाव को कम करना।
इसके फायदे हैं:
- सर्जरी के जोखिम से बचाव
- दवाइयों के साइड-इफेक्ट से राहत
- प्राकृतिक रूप से ठीक होने की प्रक्रिया को बढ़ावा
- सुरक्षित और प्रभावी उपचार
गर्दन में नस दबने के लिए बिना सर्जरी उपचार विकल्प
नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डीकंप्रेशन ट्रीटमेंट
यह एक आधुनिक, कंप्यूटर-नियंत्रित, और पूरी तरह नॉन-सर्जिकल उपचार है। इसमें विशेष डीकंप्रेशन टेबल की मदद से रीढ़ को कोमल और नियंत्रित खिंचाव दिया जाता है।
इससे:
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- डिस्क के अंदर निगेटिव प्रेशर बनता है
- नसों पर पड़ा दबाव कम होता है
- डिस्क को पोषण और पानी वापस मिलता है
- शरीर की प्राकृतिक रूप से ठीक होने की प्रक्रिया शुरू होती है
नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डीकंप्रेशन उपचार में कोई दवा, इंजेक्शन या सर्जरी शामिल नहीं होती और यह पूरी तरह आरामदायक होता है।
फिजियोथेरेपी और स्ट्रेचिंग
विशेषज्ञ की देखरेख में किए गए व्यायाम गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं, जकड़न कम करते हैं, और मूवमेंट सुधारते हैं।
पोश्चर करेक्शन और लाइफस्टाइल में बदलाव
सही बैठने-खड़े होने की आदतें, स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखना, नियमित ब्रेक लेना, और हल्की गतिविधियाँ, गर्दन की सेहत को बेहतर बनाती हैं।
घाटकोपर (Ghatkopar) में ANSSI Wellness: सर्वोत्तम नॉन-सर्जिकल स्पाइन ट्रीटमेंट
ANSSI Wellness का घाटकोपर क्लिनिक बिना सर्जरी के गर्दन दर्द पर इलाज के लिए एक भरोसेमंद जगह है। यह क्लिनिक स्पाइन केयर के लिए पर्सनलाइज़्ड, डायग्नोसिस-आधारित तरीका अपनाता है, जिसकी वजह से हर मरीज़ को उसकी ज़रूरत के हिसाब से ट्रीटमेंट प्लान मिलता है।
यहाँ उपलब्ध हैं:
- USA प्रोटोकॉलपर आधारित नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डीकंप्रेशन ट्रीटमेंट
- बिना दवा, बिना इंजेक्शन, और बिना सर्जरी के उपचार
- अनुभवी स्पाइन विशेषज्ञ और प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट
- हर मरीज के लिए व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्लान
ANSSI Wellness का उद्देश्य दर्द की जड़ को ठीक कर मरीजों को लंबे समय की राहत देना है, ताकि वे फिर से सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकें।

