आज के समय में पुराना गर्दन का दर्द (Chronic Neck Pain) भारत में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुका है। पहले यह समस्या मुख्यतः बढ़ती उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब आईटी प्रोफेशनल्स, ऑफिस कर्मचारियों, मोबाइल और लैपटॉप का लंबे समय तक उपयोग करने वाले युवाओं, तथा गृहिणियों में भी यह सामान्य होती जा रही है।
लगातार गर्दन में दर्द, अकड़न, कंधों में भारीपन, या हाथों में झुनझुनी जैसी समस्याएँ व्यक्ति के काम, नींद, और जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। यदि समय रहते इसका सही कारण का पता न लगाया जाए, तो यह समस्या धीरे-धीरे, गंभीर रूप ले सकती है।
पुराने गर्दन दर्द के प्रमुख कारण
हर गर्दन दर्द केवल मांसपेशियों की थकान का परिणाम नहीं होता। कई बार इसके पीछे रीढ़ की हड्डी (सर्वाइकल स्पाइन) से जुड़ी संरचनात्मक समस्याएँ होती हैं।
इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:
- सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस: उम्र बढ़ने या लगातार गलत मुद्रा में बैठने से गर्दन की हड्डियों और डिस्क का घिसना।
- सर्वाइकल स्लिप्ड डिस्क या डिस्क हर्निएशन: डिस्क का बाहर निकलकर नसों पर दबाव डालना।
- डिजेनरेटिव डिस्क डिजीज: डिस्क का धीरे-धीरे अपनी लचक और नमी खो देना।
- लंबे समय तक मोबाइल देखने की आदत (टेक्स्ट नेक)।
- घंटों कंप्यूटर पर काम करना।
- गलत बैठने या सोने की आदत।
- गर्दन की मांसपेशियों में लगातार तनाव।
जब डिस्क या हड्डियों में बदलाव होता है, तो आसपास की नसों पर दबाव पड़ सकता है। इसके कारण केवल गर्दन में ही नहीं, बल्कि कंधों, हाथों, और उंगलियों तक दर्द, झुनझुनी, या कमजोरी महसूस हो सकती है।
क्यों नहीं मिलती लंबे समय तक राहत?
अधिकांश लोग गर्दन दर्द शुरू होने पर दर्द निवारक दवाइयाँ या मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाएँ लेना शुरू कर देते हैं। कुछ लोगों को इनसे कुछ समय के लिए राहत भी मिलती है।
लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब दवा बंद होते ही दर्द फिर लौट आता है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दवाएँ केवल दर्द और सूजन को कम करती हैं। वे डिस्क की संरचनात्मक समस्या या नसों पर पड़ रहे दबाव को दूर नहीं करतीं।
इसी प्रकार, फिजियोथेरेपी गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत बनाने, लचीलापन बढ़ाने, और सही मुद्रा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि यदि दर्द का मुख्य कारण गंभीर डिस्क समस्या या नसों का दबना है, तो केवल व्यायाम से हमेशा पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता।
बार-बार दर्द लौटने से मरीज मानसिक रूप से भी परेशान होने लगते हैं। कई लोग वर्षों तक अलग-अलग उपचार लेते रहते हैं, लेकिन दीर्घकालिक राहत नहीं मिलती।
सर्जरी को लेकर लोगों की झिझक
जब दर्द लंबे समय तक बना रहता है, तो कुछ मरीजों को सर्जरी की सलाह दी जाती है। हालांकि सभी मरीज इसके लिए तैयार नहीं होते।
सर्जरी को लेकर लोगों की कुछ सामान्य चिंताएँ होती हैं:
- ऑपरेशन का खर्च।
- अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता।
- रिकवरी में लगने वाला समय।
- काम से लंबी छुट्टी।
- सर्जरी संभावित जोखिम और जटिलताएँ।
इसी कारण कई मरीज पहले ऐसे उपचार विकल्प तलाशना चाहते हैं जो बिना ऑपरेशन के उनकी समस्या को नियंत्रित करने में मदद कर सकें।
नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डिकम्प्रेशन ट्रीटमेंट (NSSDT) कैसे काम करती है?
ऐसे मरीजों के लिए, जिनकी समस्या का कारण डिस्क से जुड़ी संरचनात्मक गड़बड़ी है और जो विशेषज्ञ जांच के बाद पात्र पाए जाते हैं, उनके लिए नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डिकम्प्रेशन ट्रीटमेंट (NSSDT) एक आधुनिक बिना सर्जरी का उपचार विकल्प है।
इस उपचार में कंप्यूटर नियंत्रित तकनीक की सहायता से गर्दन की रीढ़ पर अत्यंत नियंत्रित और कोमल खिंचाव दिया जाता है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य है:
- प्रभावित डिस्क के भीतर दबाव को कम करना।
- नसों पर पड़ रहे यांत्रिक दबाव को घटाना।
- डिस्क की प्राकृतिक हाइड्रेशन प्रक्रिया को समर्थन देना।
- गर्दन की कार्यक्षमता में सुधार लाना।
यह उपचार बिना ऑपरेशन, बिना दवाइयों के, और बिना अस्पताल में भर्ती हुए किया जाता है। मरीज उपचार के बाद सामान्य रूप से घर जा सकता है।
हालाँकि, यह समझना आवश्यक है कि NSSDT केवल मशीन आधारित उपचार नहीं है। बेहतर परिणामों के लिए इसे एक समग्र पुनर्वास ( Rehabilitation) कार्यक्रम के साथ जोड़ा जाता है, जिसमें शामिल हो सकते हैं:
- फिजियोथेरेपी
- पोश्चर करेक्शन
- गर्दन और कंधों की स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज
- एर्गोनॉमिक सलाह
- जीवनशैली में आवश्यक बदलाव
इस प्रकार उपचार केवल दर्द कम करने पर नहीं, बल्कि समस्या के मूल कारण को ध्यान में रखकर किया जाता है।
किन मरीजों को लाभ मिल सकता है?
विशेषज्ञ द्वारा विस्तृत जांच और एमआरआई रिपोर्ट का मूल्यांकन करने के बाद, निम्न स्थितियों वाले पात्र मरीजों के लिए, नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डिकम्प्रेशन ट्रीटमेंट का विचार किया जा सकता है:
- सर्वाइकल स्लिप्ड डिस्क
- सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस
- डिस्क बल्ज
- नस दबने से होने वाला गर्दन और हाथ का दर्द
- डिजेनरेटिव डिस्क डिजीज
यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर मरीज इस उपचार के लिए पात्र नहीं होता। कुछ गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थितियों या आपातकालीन मामलों में सर्जरी आवश्यक हो सकती है। इसलिए किसी भी उपचार का निर्णय हमेशा अनुभवी ऑर्थोपेडिक या स्पाइन विशेषज्ञ की सलाह से ही लेना चाहिए।
ANSSI के बारे में:
ANSSI Wellness रीढ़ की समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करता है। आधुनिक नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डीकंप्रेशन उपचार के माध्यम से, ANSSI मरीजों को बिना-सर्जरी एक सुरक्षित, प्रभावी, और देखभालपूर्ण माहौल में ठीक होने में मदद करता है।
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