लंबे समय से पीठ या गर्दन के दर्द से परेशान रहना किसी के लिए भी मुश्किल हो सकता है। बैठने, चलने, सोने, काम करने, और रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों में भी परेशानी होने लगती है। कई मरीज दवाइयों, आराम, और फिजियोथेरेपी से कुछ समय के लिए राहत महसूस करते हैं, लेकिन दर्द दोबारा लौट आता है।
जब जाँच में स्लिप्ड डिस्क का पता चलता है और रीढ़ की सर्जरी की सलाह दी जाती है, तो मरीजों के मन में कई सवाल उठते हैं। क्या सर्जरी जरूरी है? क्या बिना-सर्जरी दर्द से राहत मिल सकती है? क्या कोई दूसरा उपचार उपलब्ध है?
हर स्लिप्ड डिस्क में सर्जरी जरूरी नहीं होती। कुछ मरीजों में उचित नॉन-सर्जिकल उपचार से लक्षणों में सुधार हो सकता है। हालांकि, सही विकल्प का चुनाव बीमारी की गंभीरता, नर्व पर दबाव, और मरीज की चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए।
स्लिप्ड डिस्क क्या है और इससे दर्द क्यों होता है?
हमारी रीढ़ की हड्डी कई छोटी हड्डियों (वर्टेब्रे) से बनी होती है। इनके बीच नरम, गद्दीनुमा संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें डिस्क कहा जाता है। ये डिस्क रीढ़ का भार सँभालने और रीढ़ को लचीला बनाए रखने में मदद करती हैं।
कभी-कभी उम्र से जुड़े बदलाव, चोट, या अन्य कारणों से डिस्क का बाहरी हिस्सा कमजोर हो सकता है। डिस्क बाहर की ओर उभर सकती है, या उसके अंदर का पदार्थ बाहर की तरफ निकल सकता है। इसे सामान्य भाषा में स्लिप्ड डिस्क कहा जाता है।
यदि उभरी हुई डिस्क आसपास की तंत्रिका (नर्व) पर दबाव डालती है या उसे परेशान करती है, तो दर्द और अन्य लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं।
स्लिप्ड डिस्क के सामान्य लक्षण
- पीठ या गर्दन में लगातार दर्द।
- कमर से जांघ और पैर तक फैलता दर्द, जिसे साइटिका भी कहा जाता है।
- गर्दन से कंधे, बाँह, या उँगलियों तक दर्द।
- हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन।
- मांसपेशियों में कमजोरी या कुछ गतिविधियाँ करने में परेशानी।
- लंबे समय तक बैठने, झुकने, या कुछ विशेष गतिविधियों के दौरान बढ़ने वाला दर्द।
हर मरीज में सभी लक्षण दिखाई नहीं देते। कुछ लोगों की जाँच में डिस्क में बदलाव दिखते हैं, लेकिन उन्हें कोई विशेष परेशानी नहीं होती। इसलिए केवल एमआरआई रिपोर्ट के आधार पर उपचार तय करना उचित नहीं है। लक्षणों, शारीरिक जाँच, और जरूरत पड़ने पर एमआरआई रिपोर्ट को साथ समझना जरूरी है।
रीढ़ की सर्जरी: संभावित लाभ और जोखिम
कुछ परिस्थितियों में रीढ़ की सर्जरी आवश्यक हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि तंत्रिका पर गंभीर दबाव हो, मांसपेशियों की कमजोरी लगातार बढ़ रही हो, या उचित नॉन-सर्जिकल उपचार के बावजूद गंभीर लक्षण बने रहें, तो विशेषज्ञ सर्जरी पर विचार कर सकते हैं।
सर्जरी का उद्देश्य स्थिति के अनुसार तंत्रिका पर दबाव कम करना या रीढ़ की संरचनात्मक समस्या का उपचार करना हो सकता है। कई मरीजों के लिए यह आवश्यक और लाभकारी उपचार हो सकता है।
हालाँकि, किसी भी ऑपरेशन की तरह रीढ़ की सर्जरी में भी कुछ संभावित जोखिम होते हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं:
- इंफेक्शन और रक्तस्राव।
- तंत्रिका या आसपास की संरचनाओं को चोट।
- बेहोशी की दवा से संबंधित जटिलताएँ।
- दर्द या अन्य लक्षणों का पूरी तरह समाप्त न होना।
- फिजियोथेरेपी और पुनर्वास की आवश्यकता।
- कुछ मामलों में अतिरिक्त उपचार या दूसरी प्रक्रिया की जरूरत।
इन जोखिमों का अर्थ यह नहीं है कि सर्जरी को टालना चाहिए। मरीज को अपने विशेषज्ञ से सर्जरी के संभावित लाभ, जोखिम, उपलब्ध विकल्प, और उपचार में देरी के परिणामों के बारे में स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए।
नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डीकंप्रेशन ट्रीटमेंट क्या है?
नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डीकंप्रेशन ट्रीटमेंट (NSSDT) रीढ़ से जुड़ी कुछ समस्याओं के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक नॉन-सर्जिकल उपचार पद्धति है।
इस उपचार में विशेष कंप्यूटर-नियंत्रित डीकंप्रेशन टेबल का उपयोग किया जाता है। मरीज को टेबल पर आरामदायक स्थिति में लिटाया जाता है और एक विशेष पट्टे की सहायता से संबंधित रीढ़ के हिस्से को लक्षित किया जाता है।
उपकरण द्वारा नियंत्रित और निर्धारित तरीके से खिंचाव की शक्ति लगाई जाती है। इसका उद्देश्य रीढ़ के लक्षित हिस्से पर पड़ने वाले यांत्रिक भार और तनाव को कम करने में मदद करना होता है।
यह प्रक्रिया सर्जरी की तरह डिस्क को काटकर या हटाकर नहीं की जाती। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डीकंप्रेशन ट्रीटमेंट हर प्रकार की स्लिप्ड डिस्क का उपचार नहीं है। इसकी उपयुक्तता मरीज की जाँच और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करती है।
पूरक चिकित्सा पद्धतियों की भूमिका
स्लिप्ड डिस्क से जुड़े दर्द के प्रबंधन में केवल एक उपचार पर निर्भर रहना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। मरीज की स्थिति के अनुसार फिजियोथेरेपी, उचित व्यायाम, शारीरिक गतिविधियों में बदलाव, और बैठने-उठने की मुद्रा में सुधार भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
उपयुक्त मरीजों के लिए NSSDT के साथ फिजियोथेरेपी और व्यक्तिगत पुनर्वास योजना शामिल की जा सकती है। इसमें मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम, शरीर की गतिविधियों में सुधार, सही मुद्रा, और दैनिक जीवन में अपनाई जाने वाली सावधानियों पर मार्गदर्शन दिया जा सकता है।
उपचार की अवधि और सत्रों की संख्या मरीज की स्थिति और उपचार के प्रति प्रतिक्रिया के अनुसार निर्धारित की जाती है। किसी भी उपचार से पूर्ण या स्थायी राहत की गारंटी नहीं दी जा सकती।
क्या हर मरीज के लिए नॉन-सर्जिकल उपचार उपयुक्त है?
नहीं। यदि मरीज को तेजी से बढ़ती कमजोरी, चलने में गंभीर परेशानी, रीढ़ की अस्थिरता, या तंत्रिका पर गंभीर दबाव जैसी समस्या है, तो तत्काल विशेषज्ञ से स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी हो सकता है।
यदि पेशाब या मल पर नियंत्रण में अचानक परेशानी हो, जाँघों के बीच या गुप्तांगों के आसपास सुन्नपन हो, अथवा कमजोरी तेजी से बढ़ रही हो, तो तुरंत क्लीनिकल सहायता लें। ऐसे लक्षण गंभीर तंत्रिका पर दबाव के संकेत हो सकते हैं।
ANSSI के बारे में:
ANSSI Wellness रीढ़ की समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करता है। आधुनिक नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डीकंप्रेशन उपचार के माध्यम से, ANSSI मरीजों को बिना-सर्जरी एक सुरक्षित, प्रभावी, और देखभालपूर्ण माहौल में ठीक होने में मदद करता है।
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