आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, घंटों कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करना, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं को तेजी से बढ़ा दिया है। इनमें स्पोंडिलोसिस सबसे आम समस्याओं में से एक है। पहले इसे केवल बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन आज यह युवा पेशेवरों, विद्यार्थियों, और लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोगों में भी देखने को मिल रही है।
अच्छी बात यह है कि सही जीवनशैली अपनाकर स्पोंडिलोसिस होने की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि स्पोंडिलोसिस क्या है, इसके कारण क्या हैं, और किन आदतों को अपनाकर आप अपनी रीढ़ को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं।
स्पोंडिलोसिस क्या है?
स्पोंडिलोसिस रीढ़ की हड्डी में होने वाले उम्र या लगातार पड़ने वाले दबाव के कारण होने वाले अपक्षयी (Degenerative) बदलावों को कहा जाता है।
समय के साथ स्पाइनल डिस्क पतली होने लगती हैं, जोड़ों में घिसाव होने लगता है, और हड्डियों के किनारों पर बोन स्पर्स (ऑस्टियोफाइट्स) विकसित हो सकते हैं। यदि ये परिवर्तन नसों पर दबाव डालने लगें, तो गर्दन, पीठ, कंधों, हाथों या पैरों में दर्द, झुनझुनी, और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
स्पोंडिलोसिस क्यों होता है?
स्पोंडिलोसिस के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- बढ़ती उम्र के साथ स्पाइनल डिस्क का घिसना।
- लंबे समय तक गलत मुद्रा (पोश्चर) में बैठकर काम करना।
- मोबाइल और लैपटॉप का अत्यधिक उपयोग।
- शारीरिक व्यायाम की कमी।
- मोटापा, जिससे रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
- बार-बार भारी वजन उठाना।
- धूम्रपान और असंतुलित आहार, जो हड्डियों और डिस्क के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
स्पोंडिलोसिस से बचने के लिए 5 महत्वपूर्ण जीवनशैली सुझाव
हालाँकि उम्र बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन सही आदतों से रीढ़ पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम किया जा सकता है।
1. सही पोश्चर बनाए रखें
ऑफिस में काम करते समय या मोबाइल इस्तेमाल करते समय गर्दन को अधिक झुकाकर बैठना रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव डालता है। हमेशा सीधी पीठ के साथ बैठें, स्क्रीन को आँखों के स्तर पर रखें, और हर 30-40 मिनट में अपनी बैठने की स्थिति बदलें।
2. नियमित व्यायाम करें
रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित रूप से गर्दन, पीठ, और कोर मसल्स के व्यायाम करें। हल्की स्ट्रेचिंग, योग, और विशेषज्ञ द्वारा बताए गए एक्सरसाइज रीढ़ का लचीलापन बनाए रखने में मदद करते हैं।
3. लंबे समय तक लगातार न बैठे
घंटों तक बिना उठे बैठे रहने से रीढ़ की डिस्क और मांसपेशियों पर लगातार दबाव बना रहता है। यदि आपका काम बैठकर करने वाला है, तो हर 30 से 45 मिनट में उठकर कुछ मिनट टहलें और हल्की स्ट्रेचिंग करें।
4. स्वस्थ वजन और संतुलित आहार बनाए रखें
अधिक वजन रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव डालता है। अपने भोजन में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन D, मैग्नीशियम, और ताजे फल एवं हरी सब्जियाँ शामिल करें। पर्याप्त पानी पीना और संतुलित आहार लेना हड्डियों तथा मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
5. भारी वजन सही तरीके से उठाएँ और धूम्रपान से बचें
यदि भारी वस्तु उठानी हो, तो केवल कमर के बल झुकने के बजाय घुटनों को मोड़कर वजन उठाएँ। साथ ही धूम्रपान से बचें, क्योंकि यह रीढ़ की डिस्क और हड्डियों तक पोषक तत्वों की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
किन लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए?
स्पोंडिलोसिस के शुरुआती लक्षणों को अनदेखा करने से समस्या समय के साथ गंभीर हो सकती है। यदि आपको निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो स्पाइन विशेषज्ञ या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए:
- लगातार गर्दन या कमर में दर्द।
- गर्दन घुमाने या झुकाने में कठिनाई।
- कंधे, हाथ, या पैरों तक फैलता दर्द।
- हाथों या पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन।
- मांसपेशियों में कमजोरी।
- संतुलन बनाने या चलने में कठिनाई।
- दर्द के कारण दैनिक कार्यों में परेशानी।
समय पर सही जाँच और उपचार से कई मामलों में समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
बिना सर्जरी के उपचार विकल्प
स्पोंडिलोसिस के अधिकांश रोगियों का उपचार बिना सर्जरी के किया जा सकता है, विशेषकर यदि समस्या का समय पर पता चल जाए।
उपचार के प्रमुख विकल्पों में शामिल हैं:
- फिजियोथेरेपी और व्यक्तिगत व्यायाम कार्यक्रम।
- पोश्चर करेक्शन और एर्गोनॉमिक सलाह।
- जीवनशैली में सुधार।
- वजन नियंत्रण।
- आवश्यकता अनुसार दर्द और सूजन नियंत्रित करने वाली दवाएँ।
यदि स्पाइनल डिस्क से संबंधित समस्या के कारण लंबे समय से गर्दन या कमर में दर्द बना हुआ है, तो विशेषज्ञ की सलाह पर नॉन-सर्जिकल स्पाइनल डीकम्प्रेशन ट्रीटमेंट (NSSDT) पर भी विचार किया जा सकता है। यह कंप्यूटर नियंत्रित तकनीक, चयनित रोगियों में स्पाइनल डिस्क पर पड़ने वाले दबाव को कम करने और प्रभावित नसों पर तनाव घटाने के उद्देश्य से, इस्तेमाल की जाती है। इसे आमतौर पर फिजियोथेरेपी, व्यायाम, और जीवनशैली में सुधार के साथ एक समग्र उपचार योजना का हिस्सा बनाया जाता है।
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